श्री दत्तात्रेय स्तोत्र
कभी किसीको जुबान दो तो उसे पूरा करो ।
प्रारब्ध के अनुसार सुख – दुःख भोगे बिना कोई रास्ता नहीं है
जितनी तितिक्षा , भजनानंद उतना ही ज्यादा
जब तक संतकृपा/गुरुकृपा न हो तब तक इन आँखों से परमात्मा दर्शन संभव नहीं है  ।
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जगत में दरिद्रता के समान दुःख नहीं है तथा संतों के मिलने के समान जगत् में सुख नहीं है