आजकल जो लोग निराश हो आत्महत्या करते है, उनके लिए आपका क्या सन्देश है ?

प.पु.पुनीताचारिजि महाराज

आप के अनुरुप सब घटना घटे तो आप उसे सुख शांति मानते हो पर आप के अंदर जो बैठा है ना वो देखता है कि आपका भला किस में हैं , आत्महत्या कभी भी मत करना, आत्महत्या करने वाले को एक हजार वषँ तक प्रेत होना पड़ता है, शास्रत्रौ में लिखा है | ऐसे जिन्दा रहोगे तो कोई इंसान भी आपकी मदद कर दे शायद | लेकिन अगर आत्मा हत्या करके प्रेत बन कर हवा में एक हजार वषँ रहोगे तो बहुत कठिन होगा, बहुत भोगना पड़ता हे, बहुत यातनाए होती हैं | कभी जहर खा कर, अग्नि में जल कर या कभी नदी में कूदकर मरना नही। जिन्दा रहना, संकट से घबराना नहीं, धीरज रखना, ईश्वर पर विश्वास भरोसा करो अच्छा हो जायेगा । कोई कोई किसी से नहि मिल पाता तो मर जाते हैं। अरे इतना समपँण भगवान में रख तो अच्छा है । किसी किसी के लिए लोग जान दे देते हैं । कहीं छोकरी मर जाती हैं तो कहीं छोकरा मर जाता है । एक दूसरे से शादी नहीं हुई , प्रेम नहीं हुआ तो मर गये । ये आपकी अज्ञानता है । आप जो चाहते हो, आप जहाँ जाना चाहते हो वो शाश्वत नहीं है। आपको ज्ञान नहीं है इस लिए अंधेरे में पड़े हो ।

इसलिए मन की जो शांति है वो ज्ञान में है, भक्ति में है, ईश्वर प्राप्ति में है । इस जगत में नहीं है । इसलिए आप सत्संग करे । कभी बैठ कर ध्यान करना, अनुभूति करना तो समज पाओगो की शांति क्या है, मन क्या है और भौतिक जगत में जीना कैसे है । इस भौतिक जगत में जीना जो है वो एक कला है । “योग: कर्मसु कौशलम्” जिने की कला जो है वही योग है, वही साधना है। और जीने की कला वही है | हमेशा ईश्वर कृपा तेरे ऊपर हे | मानव शरीर जो मिला है उसे प्राप्त करके हमेशा खुश रहो, संतुष्ट रहो। जो देता है उस में प्रसन्न रहो । जो आता हैं उस में खुश रहो। प्रयास करो, प्रयास करने के बाद भी भौतिक जगत में सफलता न मिलती हो तो परेशान नहीं होने का, चिंता नहीं करने की, और पलायन तो कभी भी मत स्वीकारना | नसीब में होगा वही मिलेगा ।

एकबार एक महात्मा आये यहाँ , जयराम दास | वो बोले की मैं भी जा रहा हूँ दत्तशिला और दत्त भगवन हमको मिलेंगे | हम बोले की वो तो सभी को मिलते है | यह घटित घटना है | तो वो गया वहां | और खाये पिए बिना ३ दिन तक रोज जाए और आवे | बोले की भगवन हमको क्यों नहीं मिलते है ? मेरे को अभी मरना है जीना नहीं है | तो उसको बोलते है की (ध्यान में उसको बताते है की) तुम्हारा अभी समय पका नहीं है | तो वो बोलता है की आप पुनीत बापू को मिले तो हमको क्यों नहीं ? तो बोले की पुनीत बापू जो है वो कितने समय तक भजन किया वो तुझे पता नहीं है | तू तो अभी भजन कर रहा है, शादी करके तू अपनी पत्नी को भी छोड़ दिया है, वो भी दुखी है, इधर उधर फिर रही है | और तू जो है भगवन चाहता है , उसके अंदर तुझे भगवन नहीं दीखता ? शादी क्यों किया ? और करने के बाद निभाना चाहिए | किसीसे दोस्ती मित्रता मत करो, अगर करो तो मरण पर्यन्त उसे निभाओ | भागो मत इधर उधर, दौड़ो मत | तो जो पति अपनी पत्नी के प्रति और पत्नी अपने पति की तरफ समर्पित रहती है , इधर उधर नहीं मन ले जाती है, भगवन के तरफ साधना में लगी रहती है उसको सफलता मिलती है | इसीलिए तुझे इस जन्म में भगवान नहीं मिलेगा ऐसा नहीं बोलता हूँ , लेकिन तुमने अभी इतना त्याग और समर्पण नहीं किया है | फिर वो समझ गया की उसको हमारी बात बता दिए दत्त महाराज |

तो में क्या कहता हूँ की इसको ज्यादा लाभ होता है और हमको कम ऐसी ईर्ष्या कभी मत करो | उन्होंने पहले बहुत कुछ किया है , इसीलिए उनको मिल रहा है | तो जो बैंक में जमा करता है, दान करता है, गरीबो को खिलाता है, देता है ये सब बैंक में जमा होता है समझ लेना | यह व्यर्थ नहीं जाता है | ये कोष होता है , उसके फिक्स में जमा ज्यादा है | दूसरे जन्म में आप शायद समृद्ध हो कर आओगे, खूब पैसा होगा, फिर भी ध्यान रखना की ये सब आपके पिछले जन्म की ही कमाई है इसीलिए अभी भी खेत में बोते रहो, किसी गरीब को, असहाय को , जरूरतमंद को देते रहो, तो तुम्हारा ये जन्म मरण का फेरा ठीक से चला करेगा | अगर भगवान में मन लगा लो गे तो मुक्त हो जाओगो । इसलिए ईश्वर कृपा करता है और ज्ञान भक्ति अगर देता है, तो आप हमेशा प्रसन्न रहोगे , खुश रहोगे | इसीलिए शांति जो है ईश्वर के भजन में है, संतोष में है, समर्पण में है और ज्ञान-भक्ति में है। भागने में नहीं है। शांति अगर चाहते हो तो वो संतोष, ज्ञान, समँपण , सेवा और प्यार में है। परम शांति इसी में मिलेगी । हमेशा खुश रहोगे ।

बड़े बड़े संतो को देख लो, भिक्षा यहाँ माँगा और वहां माँगा , केवल खाने भर को मांगते है | फिर भी आखा दिन भजन करते है, उनको और कुछ चाहिए ही नहीं । बोलते हैं कि ईश्वर ने इतना अमूल्य शरीर दिया है इससे ज्यादा वह और क्या दे , इसका सदुपयोग करो, ध्यान से जियो और अच्छे मार्ग में उसे ले जाओ । ऐसा सोच करके भजन करो | गरीब नहीं हो तुम, जिसका दिल गरीब है वो गरीब है | अपने पास कुछ नहीं होना गरीबी नहीं है। विदुरजी के पास कुछ नहीं रहा, फिर भी बड़े धनी रहे | विदुरजी के यहाँ भगवान गए और साग भाजी वो भी बगैर नमक के खाये , आपके यहाँ नहीं आते है , दुर्योधन के यहाँ मेवा पकवान खाने नहीं गए है । श्रीमंत वो है जिसका मन संतुष्ट है , ईश्वर में लगा हुआ है, समर्पण और सेवा में रहता है । जो कुछ भी मिलता है उसमे संतुष्ट रहता है, और हमेशा सत्कर्म में लगा रहता है वो श्रीमंत है | करोड़पति आदमी , जिसके दिल से एक पैसा छूटता नहीं है और खाली कमाने के धंधे में रहता है, वो श्रीमंत होते हुए भी दरिद्र ही है | उसके खाते में कुछ जमा नहीं होता | इसीलिए “श्रुचीनां श्रीमतां ग्रेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते“, जब जब जन्म मरण होगा आपका किया हुआ सबसे पहले आपके सामने आ जाता है, यह शास्त्रों का नियम है, इसमें तर्क मत करना , अगर तर्क करना हो तो मेरे पास आ जाना २-४ मिल करके, में प्रूफ दे कर समझा दूंगा | ऐसा समझा दूंगा की फिर आपको बड़ा मुश्किल हो जायेगा की सही क्या है | १-२ को प्रूफ दिया है अभी तक सोच रहे है की में मोची हूँ , या वाणिया हूँ , फ़क़ीर हूँ की ब्राह्मण हूँ | उलझन में पड़ गए है | नहीं पूछेंगे तो अच्छा है | पूछ लिया तो तकलीफ है | इसीलिए एक दूसरे से आपका क्या रिलेशन है पिछले जन्म का ये आपको खबर नहीं है, नहीं खबर है वही बहोत अच्छा है | आप जिओ, मनुष्य जन्म मिला है तो भगवान की भक्ति करो | इसीलिए संतोष में , समर्पण में , सेवा में , सत्य में , न्याय में शांति है |

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